छत्तीसगढ़
आधुनिक कृषि तकनीक: जिले के किसानों की आय और उत्पादकता में हो रही वृद्धि
Shantanu Roy
15 Jan 2026 12:21 AM IST

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Kanker. कांकेर। कृषि अभियांत्रिकी कांकेर में उपलब्ध उन्नत कृषि यंत्रों एवं मशीन जैसे बेलर, डायरेक्ट सीड फोर राईस, मल्टी क्राप सीडड्रिल, मल्टीक्रॉप प्लांटर, मल्चर आदि का उपयोग शासकीय दर से किराये पर जिले के किसान कर रहे हैं। धान की कटाई उपरांत आधुनिक बेलर मशीन द्वारा फसल अवशेष (पैरा) से बंडल तैयार किया गया। सहायक कृषि अभियंता ने बताया कि कांकेर विकासखण्ड के ग्राम जुनवानी, मालगांव, बागोडार, गढ़पिछवाड़ी, पटौद, नांदनमारा, बेवरती, गोविन्दपुर, पुसवाड़ा, सातलोर में पैरा बंडल बनाया गया। इसी प्रकार नरहरपुर विकासखण्ड के ग्राम कुरना, लारगांव, कन्हारपुरी, चारामा विकासखण्ड के ग्राम कुर्रूभाट, भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम कोरर एवं विकासखण्ड कोयलीबेड़ा के ग्राम कापसी के किसानांं के यहां 400 घंटे कार्य किया गया, जिसमें 11050 पैरा बंडल (बेल) बनाया गया। उन्होंने बताया कि प्रायः क्षेत्र के कृषक हार्वेस्टर से फसल कटाई उपरांत खेत में बचे पैरा को जला देते थे, जिससे पर्यावरण प्रदूषण होता है एवं मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। इसके अलावा बेलर मशीन से बने पैरा बंडल का उपयोग किसानों द्वारा पशुचारा एवं मशरूम उत्पादन के लिए किया जाता है। ग्राम कुर्रूभाट के कृषक विश्वनाथ नेताम ने बताया कि वह पहली बार कृषि अभियांत्रिकी में उपलब्ध बेलर मशीन से 1586 नग पैरा बेल बनवाया, जिसका उपयोग मशरूम उत्पादन एवं पशुचारा हेतु किया जाता है।
बेलर मशीन से पैरा बंडल सस्ते में बनता है, परिवहन आसान एवं भंडारण कम जगह में हो जाता है। सहायक कृषि अभियंता ने बताया कि रबी फसल हेतु खेत की तैयारी के लिए मल्चर मशीन का उपयोग जिले के ग्राम बोरगाव पुसवाड़ा, गढ़पिछवाड़ी, आतुरगांव और सरंगपाल के किसानों के खेत में कुल 70 घंटे कार्य किया गया। मशीन द्वारा खेत में बचे फसल अवशेष को बारीक कर मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ता है एवं खेत में नमी बनी रहती है। रबी फसल गेहूं, चना मूंग अलसी उड़द, मक्का की बोनी हेतु उन्नत कृषि यंत्रों, मशीनों डायरेक्ट सीड फोर राईस, मल्टी क्राप सीडड्रील, मल्टीक्राप प्लांटर का उपयोग जिले के ग्राम करप, बतबनी, कुरना, मानिकपुर, घोड़दा भैंसमुंडी, चोरिया, किरगापाटी, देवरीबालाजी, आतुरगांव, गढ़पिछवाड़ी, ब्यासकोंगेरा, पथर्री तथा सरंगपाल के किसानों के खेत में 145 घंटे कार्य किया गया। ग्राम आतुरगांव के कृषक मोहमद अय्यूब ने बताया कि पहली बार 03 एकड़ में गेहूं एवं मक्का की फसल की बोनी कृषि अभियांत्रिकी में उपलब्ध मशीन से कराया गया है, जिससे फसल बहुत अच्छी है, मशीन से गेहूं एवं मक्का की बोनी कम समय में हुआ एवं मशीन के उपयोग से लागत भी कम लगा। सहायक कृषि अभियंता ने बताया कि जिले के कृषक खेत की तैयारी धान की रोपाई कटाई-गहाई, फसल अवशेष प्रबंधन एवं रबी फसल की बोनी हेतु आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग कर रहे हैं। आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से किसान कम लागत एवं कम मेहनत में अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।
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